उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज द्वारा उन्हें 'स्वामी विवेकानंद यूथ अवार्ड' से सम्मानित किया जाना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि संघर्ष, सेवा और संकल्प का सम्मान है। यह उन तमाम युवाओं के लिए संदेश है कि परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि इरादा नेक हो तो रास्ते खुद बनते हैं।कभी-कभी जीवन इंसान की परीक्षा सबसे कठोर रूप में लेता है। ट्रेन दुर्घटना में दोनों पैर खो देना किसी भी व्यक्ति के लिए अंत जैसा होता, लेकिन मऊ के लाल श्री अभिषेक पाण्डे जी ने इसे विराम नहीं, नए जीवन की शुरुआत बना दिया। दर्द, असहायता और टूटन के उस दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी—बल्कि अपने दुःख को समाज की ताकत में बदल दिया।
जहाँ बहुत से लोग अपनी पीड़ा में सिमट जाते हैं, वहीं अभिषेक जी ने दूसरों के घाव भरने का संकल्प लिया। आज वे लगातार उन लोगों का सहारा बन रहे हैं जो जीवन की आपदाओं में फँसे हैं। उनका हर कदम यह सिखाता है कि पैरों से नहीं, हौसले से चला जाता है।
