राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस जनपद मऊ द्वारा हनुमान नगर भीटी में आयोजित जनपद स्तरीय प्रतियोगिता आयोजन समिति के अध्यक्ष देव भास्कर तिवारी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि श्री राजेंद्र प्रसाद जिला विद्यालय निरीक्षक मऊ ने बताया कि वैश्विक मंच पर हम पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक उन्नयन के दौर में आगे बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के इस बार के उद्देश्य सतत जीवन हेतु विज्ञान है। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ0 आलोक कुमार गुप्ता क्षेत्रीय निदेशक, एनआईओएस, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, क्षेत्रीय केंद्र हैदराबाद (तेलंगाना) से गूगल मीट के माध्यम से जुड़े। जो कोपागंज मऊ जनपद के ही निवासी हैं। डॉ0 गुप्ता ने अपने उदबोधन में बताया कि प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय में भी विज्ञान की क्या उपयोगिता है। आज भी विज्ञान हमारे दैनिक जीवन के लिए बहुत ही लाभकारी और प्रासंगिक है। किसी भी देश का विकास वहां के ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान पर ही निर्भर करता है। आज़ादी के अमृत महोत्सव के माध्यम से जो हम भारत के विश्व गुरु बनने का स्वप्न देख रहे हैं और जो प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा पर गर्व करते हैं। उसके केंद्र में कहीं न कहीं विज्ञान की ही अग्रणी भूमिका है। यदि आमजन भी अपने सोचने समझने और अपने विचारों को प्रदर्शित करने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं तो उस समाज या राष्ट्र का विकास अवश्य संभावी है। आज पाश्चयात्य देशों के समृद्धि में विज्ञान ही सहायक सिद्ध हुई है।
उन्होंने बताया कि आने वाली भारत की युवा पीढ़ी को नवाचार, रचनात्मकता, वैज्ञानिक चेतना, अन्वेषण, जिज्ञासा, कल्पना, सवेंदनशीलता, सामूहिक क्रिया, व राष्ट्र भावना जैसे गुण, कौशल व वातावरण देना होगा जिससे अगले दशक का युवा भारत विश्व को दिशा व दशा दे सके। इसके निर्माण में एक शिक्षक की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। यदि प्राचीन कालखंड के भारत की बात करें तो यहां नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, वल्लभी विश्वविद्यालय जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों ने अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षण और शोध के उच्च प्रतिमान के स्थापित किए थे। विज्ञान अपने उच्चतम स्तर पर था जिसके मार्गदर्शक चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट, भास्कराचार्य, वराहमिहिर चाणक्य, ब्रह्मगुप्त, पाणिनि, पतंजलि, नागार्जुन, गौतम, मैत्रेयी, गार्गी, थिरिवल्लूर इत्यादि अनेक महान वैज्ञानिक विद्वान थे जो गणितीय विज्ञान, खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, शल्य व चिकित्सा विज्ञान, सिविल इंजीनियरिंग, दिशा ज्ञान, योग, भवन निर्माण, ललित कला इत्यादि क्षेत्रों में विश्व का मार्गदर्शन किया और विश्व गुरु के रूप में भारतवर्ष को स्थापित किया था।
डॉ0 गुप्ता ने न्यूटन के गति के तीनों नियमों (जड़ता, त्वरण और क्रिया प्रतिक्रिया) को बहुत ही सरल तरीके से दैनिक जीवन में घटित उदाहरणों के माध्यम से समझाया जिससे वेबिनार में जुड़े सभी विद्वतजन बहुत प्रभावित हुए। आगे उन्होंने ने विज्ञान को अध्यात्म से जोड़ते हुए प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को बहुत ही सरलता से समझाया। डॉ0 गुप्ता ने सुनिश्चित किया कि फिर से गौरवशाली, समृद्ध, समर्थ और सशक्त भारत को बनाने के लिए हम सबको तथा समाज को विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाने की जरूरत है। अपने वक्तव्य के अंत में डॉ0 गुप्ता ने स्वाध्याय से स्वावलंबन और स्वावलंबन से आत्मनिर्भर भारत को बनाने के लिए जय विज्ञान जय अनुसंधान का नारा बुलंद किया।
जिला समन्वयक ऋषिकेश पांडेय ने बताया कि इस वर्ष 133 समूह के बाल वैज्ञानिकों ने अपना रजिस्ट्रेशन किया है। जिनका गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन प्रतियोगिता संपन्न हुई।
निर्णायक मंडल में डॉ सुशील द्विवेदी पीजीटी बायोलॉजी केंद्रीय विद्यालय अलीगंज लखनऊ डॉक्टर दिनेश श्रीवास्तव व डॉ बंशीधर सिंह प्राध्यापक डीसीएसके स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊ डॉक्टर ज्योत्सना अवस्थी विज्ञान संचारिका उन्नाव स्वप्निल कुमार राय प्रवक्ता नेवली इंटर कॉलेज गाजीपुर ने बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट कार्य का मौखिक प्रश्नों के माध्यम से परीक्षण किया और प्रोजेक्ट को देखा। सर्वसम्मति से जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित बाल वैज्ञानिकों
1, विनय कुमार मौर्य चंद्रा पब्लिक स्कूल मऊ कु अनन्या मिश्रा लिटिल फ्लावर चिल्ड्रन स्कूल निजामुद्दीन पुरा मऊ हरिशंकर विश्वकर्मा डीएवी इंटर कॉलेज मऊ कलरस सिंह अमृत पब्लिक स्कूल सहादतपुरा मऊ सार्थक यादव लिटिल फ्लावर इंटरनेशनल स्कूल खालिसपुर मऊ को कार्यक्रम के अध्यक्ष देव भास्कर तिवारी ने प्रशस्ति पत्र और माल्यार्पण से सम्मानित किया और बाल विज्ञानी को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए प्रेरित किया। और बताया कि यह एक अभिनव प्रयोग है जिसके माध्यम से आज के बाल वैज्ञानिक देश के भविष्य होंगे। कार्यक्रम के अंत में जिला समन्वयक ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया और बताया कि निर्णायक मंडल के सभी सम्मानित सदस्यों ने 2 दिनों में अथक परिश्रम करके परिणाम को दिया। तकनीकी सहायक के रूप में ज्ञानेश कुमार मिश्र ने सहयोग किया। इस अवसर पर बृजेश कुमार राय मनीष कुमार पांडेय शरद कुमार पांडेय अशोक कुमार मिश्र देवानन्द श्रीमती अर्चना गुप्ता कार्यक्रम का संचालन ऋषिकेश पांडेय ने किया।

