Mau- फिर से पिलाई जाएगी ‘दो बूंद ज़िंदगी की’ पोलियो

Advertisement
मऊ के लिए फोटो पर क्लिक कर संपर्क करें

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में किए लॉक डाउन के बाद स्थगित किए गए स्वास्थ्य संबन्धित कार्यक्रम और योजनाओं को एक बार फिर से हरी झंडी मिल गयी है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ सतीश चंद सिंह ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान को शुरू किए जाने को लेकर शासन का पत्र मिल चुका है जिसमें 20 सितंबर 2020 से शुरू किए जाने का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर विभागीय तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ आरके झा ने बताया कि पोलियो एक संक्रामक रोग है जो पोलियो विषाणु से मुख्‍यतः छोटे बच्‍चों में होता है। यह बीमारी बच्‍चें के किसी भी अंग को जिन्‍दगी भर के लिये कमजोर कर देती है। पोलियो लाईलाज है क्‍योंकि इसका लकवापन ठीक नहीं हो सकता है। बचाव ही इस बीमारी का एक मात्र उपाय है।  पोलियो स्‍पाइनल कॉर्ड व मैडुला की बीमारी है। स्‍पाइनल कॉर्ड मनुष्‍य का वह हिस्‍सा है जो रीड की हड्डी में होता है। पोलियो मॉंसपेशियों व हड्डी की बीमारी नहीं है। पोलियो वासरस ग्रसित बच्‍चों में से एक प्रतिशत से भी कम बच्‍चों में लकवा होता है। बच्चों मे पोलियों विषाणु के विरूद्व किसी प्रकार की प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है इसी कारण यह बच्‍चों में होता है।

पोलियो से बचाव के उपाय
डॉ आरके झा ने बताया कि पोलियो विषाणु के विरूद्व प्रतिरोधक क्षमता उत्‍पन्‍न के लिए 'नियमित टीकाकरण कार्यक्रम' व 'पल्‍स पोलियो अभियान’ के अंतर्गत पोलियो वैक्‍सीन की खुराक दी जाती है। यह सभी खुराक 05 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्‍चों के लिये अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है। बार-बार और एक साथ खुराक पिलाने से पूरे क्षेत्र के 05 वर्ष तक की आयु के सभी बच्‍चों में इस बीमारी से लड़ने की एक साथ क्षमता बढती है और इससे पोलियो विषाणु को किसी भी बच्‍चे के शरीर में पनपने की जगह नहीं मिलेगी, जिससे पोलियो का खात्‍मा हो जायेगा।