गाजीपुर तिराहा स्थित शिवम होमियोपैथिक अस्पताल में होमियोपैथी के जनक डॉ Samuel Hahnemann की जयंती बड़े ही श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर अस्पताल परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए चिकित्सकों, मरीजों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं हनीमैन जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित सभी चिकित्सकों ने उनके सिद्धांतों एवं चिकित्सा पद्धति को मानवता के लिए अमूल्य योगदान बताया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ होमियोपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद श्रीवास्तव द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि होमियोपैथी केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र उपचार प्रणाली है, जो रोग के मूल कारण को समझकर व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्तर पर कार्य करती है।
इस अवसर पर डॉ. नम्रता श्रीवास्तव ने भी अपने विचार साझा करते हुए बताया कि वर्तमान समय में होमियोपैथी जटिल से जटिल बीमारियों के उपचार में प्रभावी सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि सही केस-टेकिंग, रोगी की संपूर्ण प्रकृति का विश्लेषण एवं उचित औषधि चयन के माध्यम से दीर्घकालिक रोगों जैसे कि एलर्जी, माइग्रेन, त्वचा रोग, हार्मोनल असंतुलन एवं मानसिक विकारों में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।
कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित डॉ. आर.एम. मिश्रा ने भी होमियोपैथी के बढ़ते प्रभाव एवं जनमानस में इसके प्रति विश्वास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा पद्धति न केवल सुरक्षित है, बल्कि बिना किसी दुष्प्रभाव के रोगों को जड़ से समाप्त करने की क्षमता रखती है।
इस आयोजन में शहर के कोने-कोने से आए अनेक मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कई मरीजों ने बताया कि लंबे समय से चल रही बीमारियों में उन्हें होमियोपैथिक उपचार से राहत मिली है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है।
अस्पताल के समस्त स्टाफ की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी सफल एवं व्यवस्थित बनाया। सभी ने मिलकर इस आयोजन को एक प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक मंच के रूप में प्रस्तुत किया।
अंत में सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि वे होमियोपैथी के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करते रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुरक्षित एवं प्रभावी चिकित्सा पद्धति का लाभ उठा सकें।
यह कार्यक्रम न केवल एक जयंती समारोह था, बल्कि होमियोपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज में इसके महत्व को स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक पहल भी सिद्ध हुआ।
