सुप्रीम कोर्ट ने आज उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा बनाए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि नए प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब भी तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक नए नियमों पर रोक लगी रहेगी, तब तक वर्ष 2012 में बनाए गए पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे। दरअसल, UGC ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में 13 जनवरी को 2012 के नियमों को हटाकर नए नियम लागू किए थे। हालांकि, इन नियमों को लेकर शिक्षाविदों और विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार विरोध सामने आ रहा है। UGC का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, नस्ल या विकलांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। खासतौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और दिव्यांग श्रेणी के छात्रों एवं कर्मचारियों को संरक्षण देने के लिए ये नियम बनाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद इस पूरे मामले पर सभी की नजरें केंद्र सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

