जिला जज एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया

 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन तथा जनपद न्यायाधीश, मऊ श्री रामेश्वर महोदय के मार्गदर्शन में  जिला कारागार मऊ का औचक निरीक्षण विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा द्वारा किया गया। निरीक्षण के समय डा0 अमित रंजन, वरिष्ठ परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय मऊ साथ में मौजूद रहें। औचक निरीक्षण के समय जिला कारागार मऊ में श्री नागेश सिंह, जेलर/प्रभारी अधीक्षक, एवं श्री अमर कुमार सिंह, उप जेलर उपस्थित थे।  
औचक निरीक्षण के समय प्रभारी अधीक्षक द्वारा पूछताछ के दौरान बताया गया कि कारागार में 516 पुरुष, 23, महिला, 27 किशोर, कुल 564 बंदी कारागार में निरुद्ध है। कारागार निरीक्षण के समय महिला बैरक का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कुल 25 महिला बन्दी निरुद्ध पायी गयी । जिला कारागार में निरुद्ध 01 महिला बन्दी के साथ 06 वर्ष से कम आयु का 01 लड़का है। प्रभारी अधीक्षक द्वारा बताया गया कि बच्चे को समुचित चिकित्सा व देखभाल की जाती है तथा कारागार प्रशासन द्वारा दूध व फल दिया जाता है।
औचक निरीक्षण के दौरान सचिवं द्वारा जिला कारागार स्थित पाकशाला का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय प्रातः नाश्ता में-चाय, गुड़, दलिया, सुबह भोजन में-रोटी, चावल, अरहर की दाल, आलू पत्ता गोभी की सब्जी तथा शाम भोजन में-रोटी, चावल, मसूर की दाल, आलू कोहड़ा की सब्जी मीनू के अनुसार दिया जायेगा। पाकशाला के औचक निरीक्षण के समय पाकशाला में पर्याप्त साफ सफाई पायी गयी। निरुद्ध बन्दीगण को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराये जाने हेतु जिला कारागार स्थित पाकशाला परिसर में आर.ओ. प्लांट लगा हैं । अधीक्षक जिला कारागार को सचिव द्वारा निर्देश दिया गया कि वे बन्दी गण को जेल नियमावली के मानक के अनुसार आहार उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें।
औचक निरीक्षण के समय कारागार स्थित चिकित्सालय का निरीक्षण किया गया। कारागार चिकित्सालय के निरीक्षण के समय 16 बन्दी चिकित्सालय में भर्ती मिलें। मरीजों से पूछ ताछ में उनके द्वारा दवा इलाज समय से होना बताया गया। चिकित्सालय निरीक्षण के समय डा0 अमित रंजन, वरिष्ठ परामर्शदाता, जिला चिकित्सालय मऊ उपस्थित रहे। निरीक्षण के समय कैदियों को स्वास्थ्य के सम्बंध में और कोरोनों के पुनः प्रभावी संक्रमण की सम्भावना को देखते हुए लोगों को स्वस्थ रहने के लिए योगा तथा व्यायाम करने के लिए सलाह दिया गया तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने हेतु सचिव द्वारा निर्देश दिया गया । साथ ही साथ डा0 अमित रंजन द्वारा कैदियों के शारीरिक स्वास्थ्य की जाॅच की गयी। निरीक्षण के समय पूछ ताछ के दौरान प्रभारी अधीक्षक द्वारा बताया गया कि कारागार में निरुद्ध बंदियों का शत प्रतिशत कोरोना वैक्सीनेशन हो चुका है तथा पात्र बन्दियों को बूस्टर डोज भी लगाया जा चुका है।
निरीक्षण के समय जिला कारागार में, कारागार बंदियों के साथ विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बन्दियों को विधिक जानकारी प्रदान की गयी तथा जेल अपील, 436 ए सी.आर.पी.सी., प्ली बार्गेनिंग के सम्बंध में जानकारी दी गयी । सचिव द्वारा यह भी बताया गया कि जेल विजिटर भी समय समय पर जेल पर उपस्थित होते रहते है और जेल विजिटर के माध्यम से बन्दी अपनी समस्याओं को उन्हें अवगत करा सकते हैं।  
प्रभारी अधीक्षक को सचिव द्वारा निर्देश दिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन न्यायालय परिसर में जिला कारागार में बन्दियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं से सम्बंधित एक प्रदर्शनी लगायी जायेगी, जिससे उसे बेचकर, बिक्री से प्राप्त आय को सम्बंधित कैदी को उपलब्ध कराया जायेगा। इसके साथ ही साथ सचिव द्वारा कैदियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रोग्राम के सम्बंध में जेल अधिकारियों को जानकारी दी गयी तथा ऐसे बंदियों की लिस्ट उपलब्ध कराने हेतु निर्देश दिया गया, जो अलग-अलग क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं । इसके सम्बंध में शीघ्र ही जिला कारागार मऊ में कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारम्भ किया जायेगा। जेल निरीक्षण के दौरान यह तथ्य संज्ञान में आया कि बन्दी विजय विश्वकर्मा की जमानत 13 अप्रैल को हो चुकी हैं, लेकिन उसकी अभी तक तहसील द्वारा सत्यापन आख्या संबंधित तहसील से प्राप्त नहीं हुई है, जो कि अत्यन्त ही गलत है। ऐसी स्थिति में सम्बंधित तहसील को कारण बताओं नोटिस सचिव द्वारा जारी किया गया, जिससे कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके तथा कैदी की रिहाई सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त सचिव द्वारा लीगल एड क्लीनिक का निरीक्षण किया गया तथा बन्दियों को विधिक सुनवाई तथा सहायता के सम्बंध में जानकारी दी गयी।
साथ ही साथ सचिव द्वारा जेल के अन्दर कैदियों को उत्पाद के सम्बंध में बढ़ावा देने पर बल दिया गया। सचिव द्वारा यह भी निर्देश दिया गया कि यदि कोई बन्दी अपने हुनर का प्रयोग कर उत्पाद बढ़ाना चाहता है तो उसे प्रोत्साहित किया जाय तथा उसके द्वारा उत्पादित सामान को लोक अदालत के दिन न्यायालय परिसर में बेचा जाय तथा उससे प्राप्त आय को सम्बंधित कैदी को उपलब्ध कराया जाय, जिससे इसका प्रभाव अन्य कैदियों पर पड़े एवं कैदी जेल के अन्दर रहते हुए भी आत्मनिर्भर बन सके।
अधीक्षक जिला कारागार मऊ को सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि माननीय उच्चतम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय एवं मानवाधिकार आयोग द्वारा समय समय पर जारी दिशा निर्देशों के अधीन न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों की समुचित देखभाल व चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करें और जिन बंदीगणों के पास अधिवक्ता न हों, उनकी सूचना प्राधिकरण को तत्काल उपलब्ध करावें।