कालाजार से निपटने को स्वास्थ्य विभाग तैयार ,रतनपुरा का गाँव जमीन सहरुल्लाह कालाजार से प्रभावित

 
मऊ, - कोविड-19 के काल में कालाजार उन्मूलन को लेकर सिंथेटिक पायराथाइड का छिड़काव कराने के लिए शासन के आदेश के क्रम में जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की मच्छर जनित इकाई को निर्देश दिया कि जनपद में कालाजार प्रभावित गाँवों में इंडोर रेसीडूअल स्प्रे (आईआरएस) तत्काल प्रभाव से कराया जाये।  
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि रतनपुरा ब्लॉक का गाँव जमीन सहरुल्लाह कालाजार से प्रभवित है। कालाजार के उन्मूलन के लिए रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर एचईओ, छिड़काव टीम और आशा कार्यकर्ताओं को कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए ट्रेनिंग दी गई है। डॉ सिंह ने बताया कि रुक-रुक कर बुखार आना, भूख कम लगना, शरीर में पीलापन और वजन घटना, तिल्ली और लिवर का आकार बढ़ना, त्वचा-सूखी व पतली होना और बाल झड़ना कालाजार के मुख्य लक्षण हैं। इससे पीड़ित होने पर शरीर में तेजी से खून की कमी होने लगती है। 
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी वेक्टर बार्न डिजीज डॉ आर बी सिंह ने बताया कालाजार एक संक्रामक बीमारी है जो परजीवी लिस्मैनिया डोनोवानी के कारण होता है। यह एक वेक्टर जनित रोग भी है। इस बीमारी का असर शरीर पर धीरे-धीरे पड़ता है। कालाजार बीमारी परजीवी बालू मक्खी के जरिये फैलती है जो कम रोशनी वाली और नम जगहों जैसे की मिट्टी की दीवारों की दरारों। चूहे के बिलों तथा नम मिट्टी में रहती है। बालू मक्खी यही संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलाती है। इस रोग से ग्रसित मरीज के हाथ, पैर, पेट और चेहरे का रंग भूरा हो जाता है। इसी से इसका नाम कालाजार यानि काला बुखार कहलाता है।
जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि कालाजार की वाहक बालू मक्खी को खत्म करने तथा कालाजार के प्रसार को कम करने के लिए इंडोर रेसीडूअल स्प्रे (आईआरएस) किया जाता है। यह छिड़काव घर के अंदर दीवारों पर छह फीट की ऊंचाई तक होता है। उन्होंने बताया कि यह छिड़काव जमीन सहरुल्लाह में स्प्रे कराया जाना है। मंगलवार को दी गयी ट्रेनिंग में मलेरिया निरीक्षक रमेशचंद्र यादव, पाथ के डॉ दीपक सिंह व अरुण कुमार और आशा कर्यकर्ता मौजूद रहे।
रोकथाम 
• अपने घर को साफ रखना चाहिए। दीवार एवं आसपास के कोनों की नियमित और पूरी सफाई आवश्यक है। 
• घर में प्रकाश आना चाहिए।
• रोगी एवं स्वस्थ व्यक्ति की कड़ी (बालू मक्खी) को नष्ट करने के लिए छिड़काव जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक कराएं तथा तीन महीने तक घरों में में किसी प्रकार की सफेदी और पुताई न कराएं। 
• कमरे के जमीन से दीवार की कुछ ऊंचाई तक पक्की दीवार की चुनाई कराएं।
पुताई वाली दिवार पर छः महीने तक कोई लीपा पोती या पुताई न कराये।