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2012 में मऊ में शहीद हुए थे कोतवाल गोविंद सिंह
पुलिस और बदमाशों की आमने-सामने की मुठभेड़ की बात की जाए तो पूर्वांचल में आखिरी बार 18 अप्रैल 2012 को मऊ जिले के अवस्था इब्राहिम उर्फ मठिया गांव में कोतवाल गोविंद सिंह शहीद हुए थे। सवा पांच घंटे चली मुठभेड़ में दो बदमाश मारे गए थे।
2012 में मऊ में शहीद हुए थे कोतवाल गोविंद सिंह
मऊ जिले के चिरैयाकोट थाने के मटियाकोट गांव में पुलिस द्वारा पीछे किये जाने पर दो हथियारबंद बदमाशों ने एक घर में घुस कर दो बच्चों को बंधन बनाकर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी और उन्होंने गृहस्वामी की भी हत्या कर दी।उनके कब्जे से बंधक बनाये गये बच्चों को छुड़ा लिया गया है। मारे गये बदमाशों की पहचान गाजीपुर जखनिया के धीरत सिंह प गोरखपुर के विकास के रूप में की गई है। धीरज गाजीपुर का कुख्यात अपराधी है और उसके सिर पर 15 हजार रूपये का ईनाम घोषित था।
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सूत्रों के अनुसार, दोनों बदमाशों के इलाके में होने की जानकारी होने पर पुलिस ने उनका पीछा किया , मगर वे मटिया कोट गांव के रामजी गुप्ता के घर में घुसे और उनके हाथ में असलहा देखकर रामजी की पत्नी व बेटी घर से भाग निकले लेकिन दो बच्चे व गृहस्वामी अंदर फंसे। रामजी ने विरोध किया तो उन्हें गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। अब दोनों बच्चों को ढाल बनाकर उन्होंने पुलिस टीम पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
2012 में मऊ में शहीद हुए थे कोतवाल गोविंद सिंह
एसओजी टीम ने इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को देते हुए खुद पोजीशन ले लिया और जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। इसी टीम में शामिल शहर कोतवाल गोविंद सिंह रामजी के मकान में 30 मीटर दूर स्थित एक मंदिर के पास लोकेशन ले रहे थे कि बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलिया चलाना शुरू कर दिया। गोली लगते ही कोतवाल गिर पड़े। पुलिसकर्मी उनको जिला अस्पताल ले गए जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
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अब गोली रूक रूक कर चलती रही, पुलिस भी रूक रूक कर जवाबी फायरिंग करती रही। इस बीच एक बदमाश का धैर्य जवाब दे दिया और मकान से बाहर निकल आया जिसके कारण वह मारा गया। कुछ समय बाद से मकान के अंदर से हलचल आना बंद हो गयी थी। जब अंदर जाकर देखा गया तो दूसरा बदमाश मृत पड़ा हुआ था और दोनो बच्चें सुरक्षित थे।


