मऊ-शैक्षणिक सत्र 2019-2020 के परीक्षा हेतु विद्यार्थियों को विकल्प दिया जाए : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

 
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वैश्विक महामारी कोरोना (covid-19) ने संपूर्ण विश्व को अपने गर्त में ले लिया है | इससे विश्व की अर्थव्यवस्था, सामान्य जनजीवन के साथ-साथ समाज के सभी क्षेत्र को प्रभावित किए हुए हैं| इस महामारी ने शिक्षा को भी पूर्ण रूप से प्रभावित किया है, साथ ही विद्यार्थियों का भविष्य विशेष रूप से प्रभावित हुआ है | भारत में जब कोरोना अपनी रफ्तार पकड़ी तो शिक्षा की दृष्टि से वह समय छात्रों के वर्षभर की की गई मेहनत को परखने का समय था लेकिन इस महामारी के कारण विद्यार्थियों की परीक्षा संभव नहीं हो सकी एवं असमंजस की स्थिति बनी हुई है| इस कारण छात्र मानसिक दबाव व कई घटनाओं का सामना कर रहे हैं| 
आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्, गोरक्ष प्रान्त के प्रान्त मंत्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने ऑनलाइन प्रेस वार्ता की | प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा पर अगर गौर करें तो प्रदेश में 6 केंद्रीय, 21 राज्य, 8 डीम्ड और 29 निजी विश्वविद्यालय मिलाकर कुल 74 विश्वविद्यालय हैं| जिनमें से कुछ विश्वविद्यालय वार्षिक परीक्षा और कुछ विश्वविद्यालय सेमेस्टर के आधार पर परीक्षा को संपादित करवाते हैं| वार्षिक परीक्षा करवाने वाले विश्वविद्यालयों में उनकी घोषणा के समय परीक्षाएं चल रही थी और सेमेस्टर आधारित परीक्षाएं करवाने वाले विश्वविद्यालय अपनी तैयारियां कर रहे थे | लेकिन विश्वविद्यालयों को अपनी चल रही सभी परीक्षाएं तथा तैयारियां अकस्मात् रोकनी पड़ी | 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का यह मत है कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण जब तक जन-जीवन सामान्य नहीं हो जाता अथवा इस महामारी का कोई हल नहीं निकलता है| तब तक परीक्षाएं नहीं कराई जानी चाहिए| अगले सत्र में टाइम मैनेजमेंट करके अनियमित सत्र को नियमित किया जाए ऐसा पूर्व में भी कई संस्थाओं के द्वारा किया जा चुका है| 

इन परिस्थिति में सभी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष की भाति परंपरागत परीक्षा प्रणाली के स्थान पर विद्यार्थियों की सुविधा अनुसार विभिन्न विकल्पों को चुनने की सुविधा प्रदान की जाए- 
1. विद्यार्थियों को ऑनलाइन परीक्षा की सुविधा दी जाये, जो पारम्परिक ऑनलाइन परीक्षा के बजाय किसी एप के द्वारा या विद्यार्थियों के मोबाइल पर बहु विकल्पीय परीक्षा के माध्यम से करवाई जा सकती है। इस परीक्षा को कम प्रश्न और कम समय के आधार पर सम्पादित कराया जाए              
 2. छात्रों से असाइनमेंट बनवाकर उनको मेल या WhatsApp, गूगल फॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन ही मूल्यांकन किया जाये ।
3. उत्तर प्रदेश के जिन विश्वविद्यालयों में वार्षिक परीक्षा करवाई जाती है,उनमें अभी तक 40 से 70% परीक्षाएं सम्पन्न हो चुकी हैं,परीक्षा दे चुके विद्यार्थियों के पेपर का मूल्यांकन करने के बाद उन्ही के आधार पर औसत निकालकर परीक्षाफल बनाया जाए |
4. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को स्पेशल कैरीओवर की सुविधा प्रदान की जाये। इस सुविधा का उपयोग छात्रों को उनकी डिग्री पूरी होने तक करने दिया जाना चाहिए ।
5. विद्यार्थियों से ऑनलाइन वायबा भी लिया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की सुविधा सुचारू रूप से है वहां विडियो अन्यथा टेलेफ़ोनिक इंटरव्यू भी किया जा सकता है।
6. परीक्षाफल में सेशनल और इंटरनल परीक्षा के अंको को आधार माना जा सकता है ।
 7 .इस महामारी से लोगों के व्यवसाय,रोजगार प्रभावित हुए हैं, जिससे अगले सत्र में विद्यार्थियों को शुल्क जमा करने में कठिनाइयाँ आयेंगी, इसलिए अभाविप उत्तर प्रदेश, सरकार से आग्रह करता है कि अगले सत्र में विद्यार्थियों से अन्य मदों पर किसी भी तरह की फ़ीस को न लिया जाये और ट्यूशन फीस को लेकर आर्थिक बोझ न पड़े इसका उपाय सरकार को करना चाहिए |
8. जिन परीक्षाओं में ग्रेड मिलता है ऐसे विषयों के विद्यार्थियों को भी स्पेशल कैरीओवर दिया जाए कि वह बाद में इनके परीक्षा संपन्न कराई जाए|
9. जो छात्र अभी हॉटस्पॉट में हैं उनके लिए सप्लीमेंट्री पेपर की व्यवस्था कर सकते हैं| 
10. जहां ऑनलाइन व अन्य विकल्प उपलब्ध न हों, वहां पर मजबूरी वश पारंपरिक परीक्षा प्रणाली को अपनाना पड़ेगा, ऐसी स्थिति में परीक्षा केन्द्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है,      
 इसके लिए इंटर कॉलेजों का उपयोग किया जा सकता है | जिससे दैहिक दूरी बनाकर परीक्षाएं करा सकते हैं 
11. जिन विश्वविद्यालय में लॉकडाउन के समय शिक्षण कार्य चल रहा था उन विश्वविद्यालय को परीक्षा के पूर्व स्पेशल ऑनलाइन क्लास के द्वारा पढ़ाई पूरी करवाई जाए ताकि विद्यार्थी अपने पूरे कोर्स को पढ़ सकें | 

12. यूजीसी एमएचआरडी और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं की गाइड लाइन के अनुसार अंतिम वर्ष के छात्रों के परीक्षा विभिन्न विकल्प के आधार पर संपन्न करवायी जाएँ| अभाविप भी इसका समर्थन करती है
13. वर्तमान स्थिति को देखते हुए डेलीगेसी में रहने वाले विद्यार्थियों के सामने रहने संकट खड़ा है| शायद जब वह अपने घरों से वापस लौटे तो उनको रहने का स्थान उपलब्ध न हो 
14. परम्परागत परीक्षा प्रणाली में एक विषय के कई पेपर विश्वविद्यालयों के द्वारा कराये जाते हैं लेकिन इस विशेष परिस्थिति को देखते हुए "एक विषय-एक पेपर" की प्रणाली को अपनाया जा सकता है।
15.ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों माध्यमों का परीक्षा विकल्प छात्रों के समक्ष रखा जाये ||
  उपरोक्त सुझाव प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों में वृहद चर्चा के बाद तैयार किए गए हैं| अभाविप उत्तर प्रदेश सरकार और सभी विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह करती है कि परीक्षा के विभिन्न विकल्पों को छात्र हित में ध्यान रखते हुए परीक्षा संपन्न कराई जाए|