नगर के पूर्वी दक्षिणी क्षेत्र स्थित मदरसा दारूल हदीस में दशकांे तक शिक्षक के रूप में उर्दू की अनूठी बुनियादी तालीम देने वाले उच्च कोटि के कवि स्व0 माहिर अब्दुल हई अंसारी द्वारा लिखित गजलों को अधिवक्ता जकी महफूज द्वारा संग्रहीत कर ‘‘ख्वाबों का सफर’’ (अर्थात्-सपनों की यात्रा) नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया जिसका विमोचन समारोह नगर पालिका परिषद मऊ के सभा कक्ष में एक सम्मान समारोह में सम्पन्न हुआ। इस समारोह में साहित्यिक सूझ-बूझ रखने वाले वक्ताओं द्वारा उक्त पुस्तक के आधार स्रोत प्रचण्ड कवि एवं मदरसा दारूलहदीस के पूर्व अध्यापक स्व0 माहिर अब्दुल हई के जीवन की उपलब्धियों पर आधारित एवं विमोचित पुस्तक ‘ख्वाबों का सफर’ के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी।
इस अवसर पर उर्दू के वरिष्ठ लेखक एवं कवि डा0 शकील आजमी को भी उर्दू साहित्य में उत्कृष्ट योगदान देने हेतु उन्हें शाल एवं मोमेंटों भेंट कर सम्मानित किया गया। उनकी साहित्यिक भूमिका को दृष्टिगत रखते हुये प्रोत्साहन के स्वरूप में उन्हें पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल द्वारा 51 हजार रूपया भी दिया गया है।
सम्मान समारोह में कार्यक्रम की शुरुआत डा0 दानिश कमाल असरी के परिचयात्मक भाषण से हुई। उन्होंने स्व0 कवि माहिर अब्दुल हई के साहित्यिक शिक्षकों का पूरा शजरा (साहित्यिक वंशावली-लिट्रेरी फैमिली ट्री) को भी स्तिार से प्रस्तुत किया जो काफी प्रेरणादायक रहा। माहिर साहब के जीवन चर्चा के दौरान डा0 दानिश ने बताया कि आम तौर पर इतनी कम उम्र में साहित्य की ऐसी निपुणता, दक्षता, गुण एवं समझ की प्राप्ति आसान नहीं।
इसी प्रकार डा0 नफीस अब्दुल हकीम एवं शमीम सादिक ने भी माहिर अंसारी के साहित्यिक सफर व कार्याें की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि कम उम्र में ही माहिर साहब ने साहित्य की प्राकाष्ठा को छू ली थी। इसके लिये मेहनत के साथ सही दिशा एवं उचित मार्गदशर्न नितांत आवश्यक है जो उन्हें प्राप्त था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जकी महफूज ने इस पुस्तक का संग्रह कर इसका प्रकाशन कराया है यह वास्तव में सराहनीय है।
पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल ने माहिर अब्दुल हई की कविता पंक्तियों में शब्दों के चयन के साथ उनके साहित्यिक दृष्टिकोण पर चर्चा की और उनके साहित्य कला की विशिष्टता पर ख्याल जाहिर किया। उन्होंने कहा कि मऊ जैसे साहित्य के धनी शहर भी प्रमुख साहित्यिक परिदृश्य से इसलिये भी गायब हो जाते हैं क्योंकि वे साहित्यिक केंद्र से जुड़े नहीं रह पाते। उन्होंने युवा शोधार्थियों से उर्दू को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुये कहा कि मानव जीवन को आदर्शपूर्ण बनाने में साहित्य के योगदान का अन्य कोई विकल्प नहीं है। इस लिये भी आप अपने नगर के साहित्यिक पहचान की बहाली के लिये प्रयास करें क्योंकि यदि आप स्वयं यह जिम्मेदारी नहीं उठाते तो दूसरे भी साहित्य हित की बात नहीं कर सकेेंगे।
बज्म-ए-तामीर-ए-उर्दू के महासचिव सईदुल्ला शाद, डा0 शकील अहमद आजमी व गुमान अंसारी जैेसे उर्दू के उस्ताद शयरों ने पुस्तक की परिचयात्मक रूपरेखा को परस्तुत किया। वक्ताओं ने अपने सम्बोधनों में ख्वाबों का सफर के रचयिता माहिर अंसारी के नाम से प्रसिद्ध दिवंगत कवि के पारिवारिक पृष्ठभूमि से लेकर उनकी प्राथमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा तक लेखन और संकलन से जुड़े सभी मुद्दों को उजागर किया। जहां अन्य वक्ताओं ने स्व0 माहिर अब्दुल हई के संदर्भ में अपने विचारों को साझा किया वहीं अरशद वारसी, शहाब नोमानी, आदिल हेरा आदि ने स्व0 माहिर अब्दुल हई की गजलें पढ़ी जिसे श्रोताओं ने लीन होकर सुना।
सम्मान समारोह के कंवीनर गुफरान साजिद ने अपना विचार रखते हुये कहा कि साहित्य जीवन को बेहतर बनाने का एक मात्र जरिया है। वास्तविक मानवीय लक्ष्य को समझने के लिये साहित्य एक उचित माध्यम है। इस लिये साहित्य के क्षेत्र में इसे वांछित विद्ववत्ता प्राप्त करने वाले संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि समाज को समझने वाले दक्ष साहित्यकारों से प्रेरणा लेकर उर्दू साहित्य को आगे बढ़ाने की नितंात आवश्यकता है।
पुस्तक को पूर्ण रूप देने वाले संग्रहकर्ता जकी महफूज एडवोकेट ने बताया कि ‘ख्वाबों का सफर’ पुस्तक को प्रकाशित कराने के संदर्भ में उर्दू के माहिर व साहित्य प्रेमी पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल का भारी आर्थिक सहयोग शामिल रहा है। अपने आभार सम्बोधन के दौरान उन्होंने कहा कि तालीम को खानों में बांटनेवालों ने अब स्वीकार कर लिया है कि शिक्षा को खानों में नहीं बांटा जा सकता क्योंकि तालीम, तालीम होती है। कांवेंट एवं मदरसे से पढ़ने वाले बच्चों की दीक्षा भी समान हो सकती है। अल्बता अदबी व शेरी रवायतें (साहित्यिक एवं कविता से जुड़ी परंपरायें) असातेज़ा (शिक्षकगण) से ही मिलती हैं, जिसे हम आगे बढ़ाते हैं। संग्रहकर्ता श्री महफूज ने विशेष रूप से समारोह के कंवीनर गुफरान साजिद का नाम लेते हुये कहा कि जिन लोगों ने उक्त पुस्तक को प्र¬काशित कराने में मेरा सहयोग किया है मैं उनका हृदय से आभाारी हूँ।
सम्मान समारोह की अध्यक्षता कर रहे एमएए फाउण्डेशन के अध्यक्ष जमाल अख्तर अर्पण ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि हमें चाहिये कि हम अपने क्षेत्र के कवियों एवं लेखकों के साहित्यिक कार्याें को आगे बढ़ाने हेतु विशेष तौर पर काम करें। उन्होंने कहा कि हमारे साहित्यकार हमारे समाज के वास्तविक दर्पण एवं मार्गदर्शक हैं जिनसे मिलने वाला दिब्य साहित्यिक प्रकाश निसंदेह हमें अशिक्षा, अज्ञानता एवं सामाजिक बुराइयों से उबारने में मदद करता है। उन्होंने प्रोत्साहन देते हुये कहा कि यदि युवा साहित्यकार चाहें तो मैं अपने एमएए फाउण्डेशन को उर्दू साहित्य को आगे बढ़ाने हेतु समर्पित कर सकता हँू।
समारोह की अध्यक्षता जमाल अख्तर अर्पण ने की। संचालक जकी महफूज एडवोकेट ने उपस्थित मेहमानों का आभार व्यक्त करते हुये कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। यह समारोह गुफरान साजिद के संयोजन में सम्पन्न हुआ। इस पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष अरशद जमाल एवं विशिष्ट अतिथि डा0 शकील अहमद आजमी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसमें बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, कवि, शिक्षक, उर्दूदां तबका, नेता एवं समाज सेवी तथा युवा उर्दू कवि आदि मौजूद रहे।
