त्रिदेव धाम में उमड़ा आस्था का महासैलाब: भादी मावस पर माँ नारायणी के भजनों पर झूमे श्रद्धालु, गूंजा ‘हर-हर नारायणी, घर-घर नारायणी

मऊ: नगर के ढेकुलिया घाट स्थित सुप्रसिद्ध 'त्रिदेव धाम मंदिर' में शुक्रवार को श्री आदिशक्ति भगवती माँ नारायणी राणी सती दादी जी का पावन वार्षिक भादी अमावस्या महोत्सव 2026 असीम श्रद्धा,भक्ति और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव के उपलक्ष्य में दिल्ली और बनारस की पावन नगरी से मंगाए गए विशेष सुगंधित देशी-विदेशी फूलों,तोरण द्वारों और आकर्षक झालरों से सुंदर व मनभावन दरबार सजाया गया,जिसका अलौकिक दृश्य देखते ही बन रहा था।

गणेश वंदना एवं विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुआ। तत्पश्चात प्रारंभ हुई भक्ति संध्या देर रात तक अनवरत चली, जिसमें पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर नारायणी, घर-घर नारायणी’ और ‘जय श्री दादी जी’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान रहा। इस पुनीत अवसर पर वक्ताओं ने आध्यात्मिक महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राजस्थान के पावन झुंझुनू धाम में विराजीं श्री  राणी सती दादी जी, कलयुग में साक्षात दुर्गा स्वरूपा, सतियां री सिरमौर तथा मातृत्व, शक्ति व अखंड सौभाग्य की प्रत्यक्ष अधिष्ठात्री देवी हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए वरदान स्वरूप ही कलयुग में माँ नारायणी का प्राकट्य हुआ। अधर्म के संहार और सतीत्व की रक्षा हेतु माँ ने साक्षात चंडी व दुर्गा रूप धारण कर दुष्टों का दलन किया।

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या का दिन दादी भक्तों के लिए वर्ष का सबसे बड़ा महापर्व है। इस दिन झुंझुनू शक्तिपीठ की तर्ज पर माँ के दरबार में हाजिरी लगाने और पावन ज्योत के दर्शन करने मात्र से साधक के जन्म-जन्मांतर के संकट दूर हो जाते हैं तथा घर-परिवार पर महामाई की छत्रछाया सदैव बनी रहती है। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि मऊ का यह पावन त्रिदेव धाम नगर व पूर्वांचल की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। धाम में प्रतिदिन होने वाली पंचकालीन आरती और ब्रह्ममुहूर्त की बेला में नित्य आने वाले भक्तों को अलौकिक शांति,सकारात्मक ऊर्जा और महामाई की प्रत्यक्ष कृपा की अनुभूति होती है।

महोत्सव के दौरान माँ नारायणी के श्रीचरणों में समस्त नगरवासियों, पूर्वांचल व देश-विदेश के श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं सर्वमंगल के लिए विशेष प्रार्थना की गई। आयोजकों ने कहा कि सच्चा सौभाग्य केवल सांसारिक उन्नति में नहीं, बल्कि माँ के प्रति अनन्य समर्पण, नैतिक आचरण और जनकल्याण की सेवा भावना में निहित है।

आयोजक, प्रख्यात समाजसेवी  विजय तुलस्यान ने जैसे ही अपनी सुमधुर वाणी में भजन छेड़ा— ‘भादी मावस है आई भक्तों ने ज्योत जगाई, चंग मजीरा बाजै आँगण मैया आज पधारो रे’, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से गूंज उठा। चुनरी उत्सव के दौरान विजय तुलस्यान के भावपूर्ण भजन ‘इस बार की भादी मावस पे माँ, एक चुनरी भी हमारी स्वीकार करो’ ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

भजन प्रवाह को आगे बढ़ाते हुए अर्चना तुलस्यान, कोमल अग्रवाल तथा उपस्थित अन्य प्रेमी भक्तों ने ‘तेरा किसने किया श्रृंगार, दिल दीवाना हो गया’, ‘सुनती सबकी मावड़ी, जो भी करे पुकार’, ‘झूम के गाओ भक्तों, ये उत्सव हर रोज नहीं आता’ तथा ‘हर जन्म में दादी तेरा साथ चाहिए’ जैसे भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खोकर झूमते रहे।

उत्सव के दौरान सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में माँ नारायणी को रोली, अक्षत, मेहंदी, काजल और चुनरी अर्पित कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। माँ के चरणों में छप्पन भोग और पावन सवामणी अर्पित की गई। रात्रि में भव्य महाआरती के उपरांत विशाल भंडारे  के महाप्रसाद का वितरण हुआ, जिसमें मऊ नगर एवं  क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।

उत्सव को भव्य और सुव्यवस्थित रूप देने में विजय तुलस्यान समेत सभी दादी भक्तों एवं त्रिदेव धाम सेवा परिवार के सभी सदस्य पूरे मनोयोग से जुटे रहे। अंत में आयोजकों ने मंदिर पधारे सभी संतों, प्रशासनिक अधिकारियों, पत्रकार बंधुओं व धर्मप्रेमी जनता का आभार व्यक्त किया।
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