"कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा"—कलिकाल के इस दौर में जब मनुष्य विपदाओं और संशयों से घिरता है, तब आदिशक्ति का जाग्रत, करुणामयी और प्रत्यक्ष स्वरूप बनकर भक्तों की रक्षा करने वाली साक्षात माँ दुर्गा स्वरूपा श्री राणी सती दादी जी ही आस्था का सबसे बड़ा संबल हैं। इसी अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर के सुप्रसिद्ध व सिद्ध तीर्थ स्थल त्रिदेव धाम मंदिर में वार्षिक परंपरा के क्रम में आज श्री राणी सती दादी जी का पावन सिंजारा महोत्सव अपार भक्ति, उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
उत्सव की शुरुआत प्रातःकालीन सत्र में दादी जी के दिव्य शृंगार और पारंपरिक मेहंदी उत्सव के साथ हुई। लाल-पीली चुनरी और पारंपरिक मारवाड़ी परिधानों में सजी मातृशक्ति ने मंगल गीतों की गूंज के बीच साक्षात शक्ति स्वरूपा दादी जी के चरणों में मेहंदी अर्पित की और अखंड सौभाग्य तथा परिवार के मंगल की कामना के साथ भाव भरे मनुहार किए।
सायंकाल मंदिर का प्रांगण तब अलौकिक आनंद में डूब गया, जब फूलों से सजे नयनाभिराम हिंडोले में माता को विराजमान कर भव्य झूलनोत्सव शुरू हुआ। "झूला झूले रानी सती माँ..." के जयघोषों के बीच श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर माता को झूला झुलाया। इसके उपरांत भक्ति भजनों की मदमस्त धुनों पर पारंपरिक डांडिया रास का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते रहे।
सावन सिंजारा उत्सव का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि शक्ति स्वरूपा महामाई को सोलह शृंगार, मेहंदी और चुनरी अर्पित करने से घर-परिवार में ऋद्धि-सिद्धि का वास होता है और समस्त अमंगलों का नाश होता है।
त्रिदेव धाम मंदिर की अलौकिक महिमा को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह धाम मऊ नगर की जागृत आध्यात्मिक धरोहर है, जहाँ कदम रखते ही भक्तों के कष्ट दूर होते हैं। इस पावन अवसर पर सभी नगरवासियों व धर्मप्रेमियों से करबद्ध निवेदन किया गया कि वे कम से कम एक बार सपरिवार त्रिदेव धाम मंदिर अवश्य पधारा करें और कलयुग की प्रत्यक्ष देवी के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य बनाएं।
महोत्सव के सफल और भव्य समापन पर त्रिदेव धाम महिला मंडल सेवा परिवार द्वारा सभी उपस्थित श्रद्धालुओं, मातृशक्ति, स्वयंसेवकों व प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
