ब्राह्मण विकास परिषद जनपद मऊ के तत्पावधान में आज विद्यापीठ पब्लिक स्कूल सरवां में तुलसी जयंती का कार्यक्रम रामजी उपाध्याय के अध्यक्षता में मनाया गया। मुख्य अतिथि डॉक्टर विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि विजय प्राप्त करने के लिए विनम्रता आवश्यक होती है जिसको मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अपने जीवन में उतारा। रावण जैसे महाप्रतापी राक्षस से विजय प्राप्त की।
हमारे शरीर में ही राम और रावण दोनों विराजमान है जब हमारी सकारात्मक शक्तियां काम करती हैं तो हमारे में राम का वास होता है,तथा आचरण भी उसी तरह का हो जाता है। जब नकारात्मक शक्तियां प्रबल होती हैं तो रावण का प्रभाव होता है तथा सारे कार्य राक्षसी प्रवृत्ति के होते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के इतिहास में भक्ति काल के सगुण भक्ति के कवियों के रूप में प्रसिद्ध हो गए , वह प्रकांड विद्वान उच्च कोटि के रचनाकार ,दर्शन और धर्म के सूक्ष्म व्याख्याता, सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतिष्ठता, बहुभाषाविद्, आदर्शवादी, भविष्यदृष्टा, विश्व प्रेम के पोषक और भारतीयता के संरक्षक तथा लोकमंगल की भावना से परिपूर्ण तथा अद्भुत समन्वयकारी थे। अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि बाबा तुलसीदास जी के साहित्य हर समय के लिए प्रासंगिक और वास्तव में वह चिरंतर कालजयी और अमर साहित्य है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुन्ना दुबेने बताया कि तुलसीदास जी सामाजिक समरसता के प्रतिमूर्ति थे, अगर तुलसी नहीं रहे होते तो राम की महत्ता सामान्य व्यक्ति कैसे समझ पाता। यही कारण है रामचरितमानस सभी के
लिए ग्राह्य है। राम जी उपाध्याय ने बताया कि रामचरितमानस एक महाकाव्य नहीं है बल्कि जीवन जीने की कला को सिखाती है। वर्तमान परिवेश में रामचरितमानसकी चौपाई सभी के जीवन में अनिवार्य हो गयी है।
परिषद के महामंत्री संजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सियाराम मैं सब जग जानी करहू प्रणाम जोर-युग प्रानी।। जीवन में सभी लोगों का सम्मान करना है परम सौभाग्य होता है। अभिवादन एक ऐसा शब्द है जिसमें आत्मीयता और प्रेम छिपा होता है। मनुष्य की आंख से ही उसका प्रेम परिभाषित हो जाता है।
परिषद के जिला अध्यक्ष ऋषिकेश पांडेय ने बताया कि बाबा तुलसीदास विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत थे । रामचरितमानस का आज कई भाषाओं में अनुवाद हो करके विश्व स्तर पर शोधकार्य किया जा रहा है और जितना शोध किया जा रहा है उतना ही अधिक उसका अर्थ निकाल रहा है। अर्थात सार्वभौम सत्य है। पिता का पुत्र के साथ , भाई का भाई के साथ पति का पत्नी के साथ जो संबंध होता है वह परिवार के लिए मानक होता है। और वही परिवार महान है। जय नारायण दुबे ने बताया कि रामचरितमानस की एक ही चौपाई अगर जीवन में उतार ली जाए तो जीवन सफल हो जाएगा। कार्यक्रम के संचालक मृत्युंजय तिवारी ने विस्तृत रूप से रामचरितमानस की चौपाई के माध्यम से सभी बिंदुओं पर प्रकाश डाला और बताया कि लगातार कई वर्षों तक इस पर व्याख्यान दिया जाए वह कम है। तुलसीदास बुद्ध के बाद भारत के सबसे बड़े लोकनायक थे वह एक सच्चे लोकनायक , ज्ञान , भक्ति ,शील, शक्ति और सौंदर्य का, सगुण, और निर्गुण, व्यक्ति और समाज का, धर्म और संस्कृति का राजा और प्रजा का, वेद और व्यवहार का, विचार और संस्कार का संबंध स्थापित करता है।
इस अवसर पर से शुभम तिवारी जिला उपाध्यक्ष प्रधान संघ को ब्राह्मण विकास परिषद के द्वारा वैदिक रीति रिवाज से सम्मानित किया गया। उन्होंने जनपद में अपना स्थान बनाया।इस अवसर पर तुलसीदास जी के जीवन पर जयप्रकाश मिश्रा धनंजय पांडेय रमाकांत तिवारी हरीद्रमिश्रा, गोपाल तिवारी यशवंत उपाध्यक्ष दिनेश मिश्रा विजय दुबे, दिनेश तिवारी नवीन मिश्रा अजय तिवारी जयशंकर दुबे अखिलेश्वर शुक्ला रमेश दुबे कृष्णानंद राय ज्ञान प्रकाश मिश्रा अवधेश तिवारी ने व्याख्यान दिया। इस अवसर पर ऋषिदेव तिवारी विद्याधर तिवारी पंकज तिवारी अवधेश पांडेय रमेश चंद पांडेय हरिकेश दुबे जितेंद्र नाथ पांडे डॉक्टर प्रशांत पांडेय सत्य प्रकाश दुबे डॉक्टर योगेंद्र नाथ चौबे संजय उपाध्याय डॉक्टर ओम प्रकाश पांडेय अशोक त्रिपाठी अखिलेश कुमार दुबे उमेश तिवारी रामप्रवेश पांडेय नकुल उपाध्याय राजकुमार पांडेय जितेंद्र पांडेय रमेश चंद पांडेय इत्यादि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मृत्युंजय तिवारी एवं संजय कुमार त्रिपाठी ने किया।

