शहीदों को किया गया नमन: क्रांति की गूंज से जीवंत हुआ शहीद स्मारक, कवियों ने सुनाई रचना, श्रोता हुए विभोर




जनपद मऊ के रतनपुरा ब्लॉक परिसर स्थित शहीद स्मारक पर शहीद दिवस के अवसर पर ऐसा भावपूर्ण और ऊर्जावान वातावरण बना, मानो आज़ादी की लड़ाई की वही पुरानी गूंज फिर से जीवित हो उठी हो। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर की गई, जहां उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में संकल्प लिया कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर को जोश, जज़्बे और गर्व के साथ नमन किया गया। उनके बलिदान की स्मृति ने हर दिल में देशभक्ति की नई चेतना जगा दी। साथ ही समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें क्रांतिकारी विचारों के प्रतीक के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में रतनपुरा क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों को विशेष रूप से याद किया गया। उनके परिजनों को सम्मानित कर यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र अपने बलिदानियों को कभी नहीं भूल सकता। साथ ही स्थानीय पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया, जो अपनी लेखनी से समाज में सच और संघर्ष की आवाज़ बुलंद करते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वतंत्रता सेनानी रामसुंदर पाण्डेय के पुत्र एवं पूर्व विधायक अमरेश चंद्र पाण्डेय रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता बस्ती से आए वरिष्ठ कवि डॉ. रामकृष्ण लाल 'जगमग' ने की। संचालन साहित्यकार मनोज कुमार सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन समाजवादी नेता निसार अहमद द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के संयोजक देवेंद्र प्रसाद मिश्रा ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कहा कि शहीदों की कुर्बानियां केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती हैं।
इस आयोजन की विशेष आकर्षण रहा भव्य कवि सम्मेलन, जिसकी शुरुआत कवयित्री अनुप्रिया राय द्वारा सरस्वती वंदना "घोर रूपे महारापे सरस्वती भयंकरी" के पाठ से हुई। इसके बाद विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से देशभक्ति, सामाजिक सरोकार और समसामयिक विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
भोजपुरी कवि कृष्ण देव 'घायल' ने अपने तीखे व्यंग्य से राजनीति पर प्रहार किया, वहीं सिद्धार्थनगर से आए दीपक सिंह 'प्रेमी' ने भावनात्मक कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। बाराबंकी के डॉ. ओ.पी. वर्मा 'ओम' ने "वंदे मातरम्" की गूंज से राष्ट्रभक्ति का संचार किया। डॉ. धनंजय शर्मा ने लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर अपनी कविता के माध्यम से विचारोत्तेजक प्रस्तुति दी, जबकि बलिया के बृजेश सिंह ने अपनी ओजस्वी रचना से सभा में जोश भर दिया।
कवि अफ़ज़ल हुसैन 'अफ़ज़ल' ने "नफरत को जमाने से मिटा क्यों नहीं देते" जैसी पंक्तियों से मोहब्बत और भाईचारे का संदेश दिया। कवयित्री अनुप्रिया राय ने स्त्री-विमर्श और संवेदनाओं पर आधारित अपनी रचनाओं से श्रोताओं को गहराई🤣 से प्रभावित किया। मनोज सिंह ने प्रेम और संवेदना से भरी कविता प्रस्तुत की, जबकि अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रामकृष्ण लाल 'जगमग' ने समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार करते हुए जनचेतना का आह्वान किया।
कार्यक्रम में राणा सिंह, संतोष यादव मुन्ना, अवधेश यादव, नागेंद्र सिंह, सुशीला मिश्रा, पारस यादव, यशवंत यादव, रामप्यारे गौतम, कृष्णा यादव, हरिन्द्र राजभर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। साथ ही रतनपुरा निवासी आईएएस विपिन कुमार मिश्र के पिता देवेंद्र कुमार मिश्र की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक संकल्प सभा के रूप में परिवर्तित हो गया, जहां हर व्यक्ति के भीतर देश, समाज और न्याय के लिए कुछ कर गुजरने की भावना स्पष्ट दिखाई दी। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भारी संख्या में उपस्थित रहे।
इस प्रकार रतनपुरा का यह आयोजन शहीदों की याद के साथ-साथ नई पीढ़ी में देशभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और परिवर्तन की चेतना जगाने वाला एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।