शहादत दिवस एवं लोहिया-जयंती पर समता सम्मेलन: शांति, समाजवाद और जनअधिकारों का राष्ट्रीय एजेंडा




नई दिल्ली, 24 मार्च। डॉ. राम मनोहर लोहिया की 116वीं जयंती तथा शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 95वें शहादत दिवस के अवसर पर 23 मार्च को टी.एन. वाजपेयी हॉल, नई दिल्ली में आयोजित समता सम्मेलन में साम्राज्यवाद के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया गया। सम्मेलन में "युद्ध नहीं, शांति चाहिए" का नारा देते हुए केंद्र सरकार से संसद में युद्धविराम प्रस्ताव पारित करने की मांग की गई। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्वच्छ हवा-पानी को मौलिक अधिकार बनाने पर जोर दिया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी ने किया, जबकि समापन आनंद मिश्रा द्वारा किया गया। खुले सत्र में सपा सांसद रामजीलाल सुमन और राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अपने विचार रखे।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता रमाशंकर सिंह, विजय प्रताप, डॉ. ऋतु प्रिया, आलोक मेहता, प्रो. चितरंजन मिश्रा और बी.आर. पाटिल ने की। मुख्य वक्ताओं के रूप में रमेश पटनायक, प्रो. अरुण कुमार, सौम्य दत्ता और अमूल्य निधि ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
लगभग नौ घंटे तक चले इस सम्मेलन में 15 राज्यों से आए 60 वक्ताओं ने भाग लिया, जिनमें 30 युवा वक्ता शामिल थे। देशभर से आए समाजवादियों ने क्रांतिकारियों के सिद्धांतों और समाजवादी मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया और भगत सिंह का समाजवादी भारत का सपना आज भी अधूरा है। उनका आरोप था कि वैश्विक स्तर पर साम्राज्यवादी शक्तियां—विशेषकर अमेरिका और इजरायल—दुनिया पर युद्ध थोप रही हैं, जिससे असमानता और कॉर्पोरेट वर्चस्व बढ़ रहा है।
सम्मेलन में धार्मिक कट्टरता, नफरत और हिंसा के बढ़ते माहौल पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और कहा गया कि इससे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, शांति और सामाजिक समता के मूल्यों को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
सम्मेलन में अमेरिका-इजरायल की युद्ध नीतियों की निंदा करते हुए भारत सरकार से संसद में युद्धविराम प्रस्ताव पारित कराने की मांग की गई। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा स्वच्छ हवा-पानी को मौलिक अधिकार बनाने, किसानों और मजदूरों के आंदोलनों का समर्थन करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और चारों लेबर कोड को रद्द करने की मांग उठाई गई।
सम्मेलन में स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत की रक्षा और समाजवादी मूल्यों की पुनर्स्थापना का संकल्प लेते हुए सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया। साथ ही साम्राज्यवाद के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने और दलित, आदिवासी, किसान व श्रमिक वर्गों के अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया गया।
सम्मेलन ने यह भी तय किया कि 26 जनवरी, 23 मार्च, 1 मई, 17 मई, 9 अगस्त, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर, 11-12 अक्टूबर और 26 नवंबर जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर युवा और महिलाओं की भागीदारी के साथ जनजागरण, जनसंवाद यात्राएं, सत्याग्रह और अन्य जन आंदोलनों का आयोजन किया जाएगा। समता, न्याय और शांति के प्रसार के लिए कला समूहों के गठन पर भी जोर दिया गया।
सम्मेलन में प्रस्ताव किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम द्वारा प्रस्तुत किए गए, जबकि संकल्प पत्र अरुण कुमार श्रीवास्तव ने रखा, जिसे उपस्थित प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से पारित किया।