एनएच-128बी पर ट्रेलरों का कहर,लगातार हो रही दुर्घटनाओं से लोग चिंतित, बढ़ रहा जनाक्रोश




मऊ–फेफना राष्ट्रीय राजमार्ग 128-बी इन दिनों आम जनता के लिए भय का कारण बनता जा रहा है। भारी ट्रेलरों की बेलगाम रफ्तार ने इस मार्ग को मानो मौत का रास्ता बना दिया है। आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं से क्षेत्र के लोग न केवल चिंतित हैं, बल्कि अब जनाक्रोश भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
सोमवार को हलधरपुर थाना क्षेत्र के अदरी मोड़ स्थित किड्स केयर इंटरनेशनल स्कूल के पास घटित एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। अरदौना ग्राम पंचायत निवासी अवधेश सिंह अपनी पत्नी प्रभावती देवी को विक्की पर बैठाकर मऊ से इलाज कराकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक ट्रेलर ने उनकी विक्की को टक्कर मार दी, जिससे दोनों सड़क पर गिर पड़े। तभी पीछे से आ रही दूसरी ट्रेलर ने प्रभावती देवी को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में अवधेश सिंह भी घायल हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मृतका प्रभावती देवी (65 वर्ष) के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया। बताया जाता है कि मृतका के पति अवधेश सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनके दोनों पुत्र पुलिस विभाग में सेवारत हैं। इस हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। एनएच-128बी पर अदरी मोड़, पहसा और रतनपुरा बाजार जैसे संवेदनशील स्थानों पर भारी वाहनों की तेज़ रफ्तार पहले भी कई जानें ले चुकी है। स्कूल, बाजार और घनी आबादी वाले इलाकों में दिन-रात ट्रेलरों का तेज़ गति से गुजरना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। न तो गति सीमा का सख्ती से पालन कराया जा रहा है और न ही प्रभावी यातायात व्यवस्था दिखाई दे रही है।
इस बीच समाजवादी विचारक और जन अधिकारों के सचेत प्रहरी निसार अहमद ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एनएच-128बी पर वाहनों की बेलगाम गति पर तत्काल अंकुश लगाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि अदरी मोड़, पहसा और रतनपुरा बाजार जैसे क्षेत्रों को दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित कर भारी वाहनों की गति सीमा सख्ती से लागू की जाए, ट्रेलरों की आवाजाही समयबद्ध की जाए और नियमित ट्रैफिक निगरानी सुनिश्चित की जाए।
क्षेत्रीय जनता की भी यही मांग है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। लोगों का कहना है कि सड़कें विकास का माध्यम हैं, लेकिन लापरवाही और बेलगाम रफ्तार के कारण वे आमजन के लिए मौत का कारण बनती जा रही हैं। प्रशासन को चाहिए कि समय रहते सख्त निर्णय लेकर भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोके और आम लोगों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करे।