पराविधिक स्वयं सेवकों (पी0एल0वी0) का 04 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन पराविधिक स्वयं सेवकों को प्रशिक्षण दिया गया

 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन में माननीय जनपद न्यायाधीश श्री रामेश्वर महोदय के मार्गदर्शन में पराविधिक स्वयं सेवकों (पी0एल0वी0) का 04 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत आज प्रशिक्षण के दूसरे दिन पराविधिक स्वयं सेवकों को प्रशिक्षण विभिन्न न्यायिक अधिकारीगण, प्रशासनिक अधिकारीगण द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम को सर्वप्रथम अपर प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, कोर्ट नं0-1, श्री आनंद प्रकाश सिंह ने पारिवारिक कानून, वैवाहिक कानून तथा तलाक के अंतर के सम्बंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गयी। विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने आपराधिक कानून, भा.दं.सं. तथा दं.प्र.सं. 1973 के सम्बंध में किन परिस्थितियों में और कैसे जमानत मिलती है, के सम्बंध में बताया गया एवं गिरफ्तारी तथा रिमाण्ड के बारे में जानकारी दी गयी तथा सी0आर0पी0सी0 की धारा 357ए पीड़ित प्रतिकर योजना के सम्बंध में पराविधिक स्वयं सेवकों को बताया गया।  
उपरोक्त के अतिरिक्त सचिव द्वारा बुनियादी संचार गुण की दक्षता के सम्बंध में भी बिस्तृत जानकारी प्रदान की गयी।
प्रधान मजिस्ट्रेट, जे0जे0 बोर्ड सुश्री प्रीतिभूषण द्वारा बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम 2015 के सम्बंध में जानकारी प्रदान की गयी। उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध छोटे मामलों में कोई एफ0आई0आर0 दर्ज नहीं की जायेगी, केवल गंभीर मामलों में ही एफ0आई0आर09 दर्ज की जाएगी तथा अधिकतम 3 वर्ष तक सजा का प्रावधान उक्त अधिनियम के अन्तर्गत है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे बच्चों के नाम की पहचान जाहिर नहीं किया जायेगा। यदि कोई ऐसे बच्चों का नाम एवं पहचान प्रदर्शित करता है तो उसे दो लाख रुपये तक का जुर्माना तथा कैद का भी प्रावधान है। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री रुद्रप्रताप सिंह ने बाल श्रम निषेध कानून 1986 के सम्बंध में बिस्तार से बताया गया तथा उनके द्वारा बाल विवाह निषेध अधिनियम तथा चाइल्ड हेल्प लाइन के सम्बंध में भी जानकारी प्रदान की गयी। जेलर श्री नागेश सिंह ने जेल मैनुअल के अनुसार बंदियों के अधिकार के संबंध में जानकारी दी गयी तथा यह भी बताया गया कि आधुनिक समय में जेलों का उद्देश्य अपराधी को सिर्फ जेल में बंद रखना हीं नहीं है, उन्हें सुधार कर समाज में पुनर्स्थापित करना है।