घोसी --जगपूरनी देवी बरखू स्मृति व्याख्यानमाला एवं बहुजन प्रेरणा सम्मान समारोह" का हुआ आयोजन

घोसी-मऊ-ब्लॉक घोसी अंतर्गत माछिल जमीन माछिल में शिक्षक एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रामविलास भारती द्वारा आयोजित अपने माता जगपूरनी देवी की दसवां पिता बरखू प्रसाद व बड़े भाई श्रवण कुमार के प्रथम परिनिर्वाण दिवस की स्मृति में "जगपूरनी देवी बरखू स्मृति व्याख्यानमाला एवं बहुजन प्रेरणा सम्मान समारोह" तथा "भारतीय संविधान के परिपेक्ष्य में आजादी के 75 वर्ष : एक परिचर्चा विषयक संगोष्ठी सम्पन्न हुई। डॉ. रामविलास भारती एवं आयोजन समिति बहुजन कल्याण परिषद व महाबोधि समाज सेवा समिति उ.प्र. द्वारा प्रतिवर्ष समाज में कार्य करने वाले साहित्यकार, लेखक, कवि व सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष का "जगपूरनी देवी बरखू बहुजन प्रेरणा सम्मान प्रसिद्ध साहित्यकार, लेखक व सम्पादक राष्ट्रपति पुरस्कृत दिल्ली के मोहन दास नैमिशराय, सेवानिवृत्त शिक्षक व वरिष्ठ समाजसेवी अंगनू राम परिवर्तित नाम आनंद स्वरूप तथा बुद्धांकर भीम ज्योति समिति, मोहम्मदाबाद, मऊ के प्रबंधक व समाजसेवी दीपांकर जी को दिया गया। साथ ही इस कार्यक्रम में गांव एवं आसपास के सैकडों जरूरतमंद बुजुर्गों, विकलांगों तथा विधवाओं को अंगवस्त्र तथा कंबल भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया। तो वहीं सामाजिक कार्यकत्री मंजू देवी व समाज सेवी हीरा को तथागत बुद्ध व बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा भेंट की गई। तथा छात्र/छटाओं को सावित्री बाई फुले, बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर आदि की पुस्तकें दी गयी।
        इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार मोहनदास नैमिशराय ने कहा कि डॉ. रामविलास भारती द्वारा अपने माता पिता वह बड़े भाई की स्मृति में इस तरीके का कार्यक्रम लोकहित एवं जनहित का कार्यक्रम बन गया है हम सबको ऐसे कार्यक्रमों का अनुकरण करना चाहिए ।उन्होंने आगे कहा कि संविधान हमें जीवन जीना सिखाता है। इसलिए हमें अधिक से अधिक संविधान को पढ़ने और जानने की जरूरत है। जिन महापुरुषों ने समाज के उत्थान के लिए काम किया उनके बारे में जानें और दूसरों को भी बताएं। संवैधानिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं, उनका मुकाबला तभी किया जा सकता है जब आप सामाजिक आंदोलनों को आगे बढ़ाएंगे और सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक श्री शिवचंद राम ने कहा कि निश्चित रूप से आजादी के बाद देश कई क्षेत्रों न में प्रगति में किया है। ये पचहत्तर वर्षों की उपलब्धि है। लेकिन पिछड़ों और वंचित तबकों की सार्वजनिक सेवा में तथा शक्ति के स्रोतों में उनकी समानुपातिक भागीदारी अभी तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। एक अमेरिकी रिपोर्ट फ्रीडम इन द वर्ल्ड और हंगर इंडेक्स जो जारी हुए हैं उसमें भारत की स्थिति अभी संतोषजनक नही है। विशिष्ठ अतिथि के. सी. भारती ने कहा कि सदियों की गुलामी के बाद भारत आजाद हुआ और अपना संविधान बनाया गया। संविधान हमें समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का संदेश देता है।ब्लॉक प्रमुख डॉ रामकृष्ण यादव ने कहा कि आज हम जहां भी हैं वो संविधान की वजह से ही हैं। यदि संविधान नहीं होता तो हम आज भी गुलामी का जीवन जी रहे होते। संगोष्ठी का विषय प्रवेश करते हुए डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि संविधान में लगातार संशोधन करके और नए कानून बनाकर पिछड़े और वंचितों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। एडवोकेट प्रेमचंद कौशल ने कहा कि इन पचहत्तर सालों में हमें जहां होना चाहिए था उससे अभी बहुत पीछे हैं। विश्वनाथ ने कहा कि वंचित वर्ग आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है। डॉ. कल्पना ने कहा कि समाज को वर्गविहीन बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए और महिलाओं को अधिक से अधिक संविधान को जानने समझने की जरूरत है ताकि वो अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें। सुग्रीव प्रसाद ने कहा कि संविधान में प्रदत्त अधिकारों का हमें इस्तेमाल करना चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि हम संविधान को पढ़ें और जानें। 
          कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व डी.आई.ओ.एस. शिवचन्द राम व कार्यक्रम का संचालन लोकतंत्र सेनानी रामअवध ने किया। अंत व प्रारम्भ में कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रामविलास भारती ने सभी का स्वागत व आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर ए. डी. बेसिक कानपुर के.सी.भारती, ब्लाक प्रमुख डर.रामकृष्ण यादव, डॉ. राजेश कुमार, विश्वनाथ, डॉ. कल्पना, सुग्रीव प्रसाद, शिवकुमार भारती, मीना, डॉ. सुधा, पुष्पा, पी. डी.टण्डन" अरविन्द पाण्डेय, अवधेश बागी, मनोज सिंह, सुदर्शन, रामभवन प्रसाद, अरविन्द मूर्ति, बाबूराम, श्रीकृष्ण यादव, रामपलट राम, सुभाष चंद, एडवोकेट वीरेन्द्र प्रताप, डॉ. तेजभान, रानू, विद्या सागर, विनय, प्रशान्त भारती, शशांक भारती, निशांत भारती, छट्ठू, अनिल, महेश, बृकेश, विजय कुमार, विजय शंकर, हीरा, संजीत, नितेश कुमार, बालचन्द, अंशू कौल, राम बहादुर, डॉ. विनोद, मल्लू लाल, सन्तोष, अकील अहमद, दीपचंद प्रसाद, दयानंद, बदामी देवी, मंजू देवी, शीला, नूतन, हर्षित, पृथ्वी राज, दयाशंकर यादव, दुक्खी प्रसाद, राम रामशरीख,अमित आदि उपस्थित रहे।