उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी एक महीने की पेन्शन का आज योगदान दिया। मुंबई में उनके निवास स्थान पर आयी स्थानिक पार्षद प्रीति सातम को राम मंदिर के लिए राम नाईक ने रु. एक लाख का धनादेश दिया। राम नाईक की अगुवाई से स्थापित उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर उत्तर प्रदेश में निर्माण हो रहे भव्य राम मंदिर के लिए स्वल्प व्यक्तिगत योगदान देकर राम नाईक ने कर्तव्यपूर्ति की अनुभूति ली। राम मंदिर निर्माण के लिए शुरू सार्वजनिक अभियान के अंतर्गत मिलने आयी पार्षद प्रीति सातम, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भाग कार्यवाह श्रवण राठोड, अन्य वरिष्ठ स्वयंसेवक तथा भाजपा कार्यकर्ताओं से इस समय राम नाईक ने उत्तर प्रदेश में बिताए पाच वर्षों की कई यादें उजागर की।
राम नाईक ने कहा राम मंदिर के भूमिपूजन के पहले योगी सरकार ने फैजाबाद का फिर से जो अयोध्या नामकरण किया वह उन्हें बहुत रास आया है। राम नाईक के राज्यपाल होते हुए ही पहली बार अयोध्या में पुरी दुनिया का ध्यान खींचनेवाला दीपोत्सव हुआ था उसकी भी यादे बातचीत में निकली। इस देश की परंपरा और इतिहास पर अभिमान महसूस करने वाला हर भारतीय राम मंदिर निर्माण में अपना सहयोग देना चाहता है। इस दृष्टि से मात्र रु. दस का भी योगदान लेने की अच्छी पहल राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र समिति ने की है।
ऐसा कह कर राम नाईक ने बताया कि पूर्व राज्यपाल को तो कोई वित्तिय लाभ, पेन्शन नहीं मिलती। किंतु वें तीन बार विधायक तो पांच बार सांसद रह चुके है। जिसके चलते राज्यपाल पद समाप्ती पर उन्हें प्रति माह रु. एक लाख पेन्शन मिल रही हैं। एक महिने की पूर्ण पेन्शन को उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अर्पित किया है। सभी नागरिक राम मंदिर निर्माण में यथाशक्ति योगदान दे ऐसी अपील पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने की।

