मऊ --मा0 स्व0 चैधरी चरण सिंह भूतपूर्व प्रधानमंत्री के जन्म दिन पर किसान सम्मान दिवस के रूप में मनाया गया। जिलाधिकारी द्वारा किसान मेला का निरीक्षण करते हुए किसान को दिये जाने वाले कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर को शहर में लगभग 500 मीटर स्वयं चलाकर परीक्षण किया गया। मा0 स्व0 चौधरी चरण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर मा0 विधायक घोसी विजय राजभर एवं जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल द्वारा कार्यक्रम की शुरूवात की गयी। 23 दिसम्बर को स्व0 चैधरी चरण सिंह के जन्म दिवस को किसान सम्मान दिवस के रूप में मनाने जाने के क्रम में आज नगर पालिका कम्युनिटी हाल में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में किसान सम्मान दिवस का आयोजन किया गया। उक्त अवसर पर किसान भाईयों को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी द्व़ारा बताया गया कि सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में किसान है और किसानों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ किसानों को मिले यह मेरी भी प्राथमिकता है। जिलाधिकारी ने विस्तार पूर्वक चैधरी चरण सिंह के जन्म से लेकर उनके जीवन के बारे में विचार प्रस्तुत किये उन्होने बताया कि चैधरी चरण सिंह का जन्म जाट परिवार में 23 दिसम्बर सन् 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में चैधरी मीर सिंह के परिवार में हुआ इनके पिता किसान थे, जो अत्याधिक गरीब थे गरीबी में जीवन व्यतीत करने के बावजूद उन्होनंे पढ़ाई को पहला दर्जा दिया इनके परिवार का संबंध 1857 की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले राजा नाहर सिंह से था। इनके पिता की अध्ययन में काफी रूचि थी, इसलिए इनका भी काफी झुकाव रहा प्रारम्भिक शिक्षा नूरपुर ग्राम में ही हुई। 1929 में चरण सिंह ने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में प्रवेश किया, सर्वप्रथम इन्होनें गाजियाबाद में कांग्रेस का गठन किया, 1930 में गांधीजी द्वारा चलाये गये सविनय अवज्ञा आन्दोलन में नमक कानून तोड़ने का आव्हान किया, चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिंडन नदी पर नमक बनाया था एवं डांडी मार्च में भी भाग लिया। 1940 के सत्याग्रह आन्दोलन में यह जेल गये उसके बाद 1941 में बाहर आये, फरवरी 1937 में इन्हें विधानसभा के लिए चुना गया। 31 मार्च 1938 में इन्होनें कृषि उत्पाद बाजार विधेयक पेश किया यह विधेयक किसानों के हित में था, यह विधेयक सर्वप्रथम 1940 में पंजाब द्वारा अपनाया गया, आजादी के बाद चरण सिंह 1952 में उत्तर प्रदेश के राजस्व मंत्री बने एवं किसानों के हित में कार्य करते रहे इन्होने 1952 में जमीदारी उन्मूलन विधेयक पारित किया, इस विधेयक के कारण 27000 पटवारियों ने त्याग पत्र दे दिया, जिसे इन्होनें निडरता के साथ स्वीकार किया एवं किसानों को पटवारी के आतंकी वातावरण से आजाद किया और स्वयं लेखपाल पद का भार सम्भाला और नए पटवारी नियुक्त किये।
जिलाधिकारी ने कहा कि किसानों को उनके फसल का जो मिनिमम मूल्य दिया जा रहा है उसके जनक चैधरी चरण सिंह ही थे। जनपद के प्रगतिशील किसान कृषि विभाग से योगेन्द्र कुमार राय रौदा भगवानपुर, सुनील सिंह रतनपुरा, मोतीलाल यादव हाफिजपुर, राम नरायन यादव दादनपुर अहिरौली, मोहन मौर्य लखनी मुबारकपुर, लालचन्द यादव दादनपुर अहिरौली, रामू चैहान चकमुसैयद, उद्यान विभाग से सुरेश्ज्ञ प्रसाद मौर्य इन्दरपुर, हरिश्चन्द्र चोरपाखुर्द, राजेन्द्र राय भदसा मानोपुर, रामशब्द मौर्य कल्यानपुर, फूलचन्द सरवां, रामाश्रय मौर्य पटरांव, रामप्रकाश राय बैराठपुर, ज्ञानी साहनी सहरोज, पशुपालन विभाग से रमेश यादव रूकुनपुरा, भूवाल तिवारी तिनहरी, नवीन राय बडरांव, अनिल सिंह नसोपुर, श्रीमती गुड़िया ढाढाचवर, रामसूरत अमिला, वैद्यनाथ यादव बेलभद्र हाटा, श्रीमती रानू सिंह देवसी लग्गूपुर, गन्ना विभाग से रविन्द्र बनियापार, शिवबहादुर गोबरही, दुब्बर सरवां, रामनिवास तहिरा बीवीपुर, मत्स्य पालन विभाग से विजेन्द्र राय मुहम्मदाबाद सिपाह, अजय सैदपुर सुरहुरपुर, पप्पू बड़रांव, साहब यादव जमालपुर मिर्जापुर को मा0 विधायक विजय राजभर एवं जिलाधिकारी द्वारा पुरस्कार वितरण एवं सम्मानित किया गया। इसी क्रम में कृषि विभाग से श्रीमती सुशीला देवी मोलनापुर, शीला देवी बभनौली, ज्योतिष सिंह इमिलिया, ऋषिदेव पाल, उप कृषि निदेशक कार्यालय से लालू पाल, आनन्द सिंह, आशुतोष शुक्ला, उप सम्भागीय कृषि प्रसार सदर कार्यलय से अशोक प्रजापति को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजेश श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
उक्त अवसर पर उप कृषि निदेशक एस0पी0 श्रीवास्तव द्वारा विस्तार पूर्वक उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के बारे में बताया गया।
उक्त अवसर पर जिला विकास अधिकारी विजय शंकर राय, जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार सहित जनपद के समस्त किसान उपस्थित रहे।

