टूटी सड़कें व बदहाल व्यवस्था से औद्योगिक क्रांति लाने का दावा


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मऊ। एक ओर देश और प्रदेश में औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्टर समिट और निवेश आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं मऊ का दशकों पुराना औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। टूटी सड़कें, बजबजाती और क्षतिग्रस्त नालियां तथा कूड़े से पटी पटरियां यहां की बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रही हैं।

मऊ जनपद के सृजनकर्ता पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. कल्पनाथ राय की पहल पर तत्कालीन यूपीएसआईडीसी, वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा), द्वारा ताजोपुर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई थी। यहां करीब ढाई सौ से अधिक छोटे-बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए भूखंड आवंटित किए गए। स्व. कल्पनाथ राय की दूरदर्शी सोच के तहत उस समय सड़कों और नालियों के साथ अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। औद्योगिक क्षेत्र में निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए स्वतंत्र फीडर की योजना भी बनाई गई थी, लेकिन यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी।

पिछले एक दशक में बिगड़ी स्थिति

उद्यमियों का कहना है कि पिछले करीब 10 वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति लगातार खराब हुई है। सड़कें जगह-जगह टूट चुकी हैं, नालियां क्षतिग्रस्त होने के साथ गंदगी से बजबजा रही हैं और पटरियों पर कूड़े का अंबार लगा है। उनका कहना है कि औद्योगिक विकास के लिए समय-समय पर बजट आवंटित होने के बावजूद अपेक्षित सुविधाएं धरातल पर दिखाई नहीं देतीं।

उद्यमियों के अनुसार, सड़क संख्या 10 पिछले करीब 10 वर्षों से बेहद जर्जर है। जगह-जगह गड्ढों के कारण आवागमन में परेशानी होती है। कई स्थानों पर स्थानीय उद्यमी अपने स्तर से ईंट के टुकड़े डालकर रास्ता चलने योग्य बनाने का प्रयास करते हैं। इसी तरह नालियों की सफाई और मरम्मत में भी कई बार उद्यमियों को अपने संसाधनों का इस्तेमाल करना पड़ता है।

बजट के इस्तेमाल पर उठे सवाल

उद्यमी श्रीराम जायसवाल ने आरोप लगाया कि गत वर्ष टूटी सड़कों और नालियों की मरम्मत के लिए बजट आया था, लेकिन उसका अपेक्षित लाभ पूरे औद्योगिक क्षेत्र को नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि कुछ चुनिंदा स्थानों पर ही कार्य कराए जाने से अन्य हिस्सों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि कई बार उद्यमियों को टेंडर हो जाने और शीघ्र काम शुरू होने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन लंबे समय तक कार्य धरातल पर नहीं दिखाई देता।

उन्होंने बताया कि करीब दो किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले औद्योगिक क्षेत्र में तीन हाईमास्ट लाइटें लगाई गईं, लेकिन उनका लाभ सीमित क्षेत्र तक ही पहुंच पा रहा है।

यूपीसीडा ने कहा—शीघ्र शुरू होगा कार्य

इस संबंध में यूपीसीडा के क्षेत्रीय कार्यालय के प्रधान लिपिक राकेश यादव ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में समय-समय पर अनुरक्षण कार्य कराया जाता है। इसके लिए स्थानीय उद्यमी संगठनों से भी सुझाव लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समस्याओं के निदान के लिए शीघ्र ही कार्य शुरू कराया जाएगा।

स्वतंत्र फीडर और अग्निशमन केंद्र की मांग

लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष कन्हैया लाल जायसवाल ने बताया कि स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र में अग्निशमन केंद्र और स्वतंत्र विद्युत फीडर के लिए पिछले करीब 10 वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार यूपीसीडा की ओर से जमीन उपलब्ध कराने की बात कही जाती रही है, लेकिन अभी तक इन सुविधाओं की स्थापना नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि सड़कों और नालियों के निर्माण के लिए भी टेंडर की बात कही जाती है, लेकिन कार्य समय से पूरा नहीं होने के कारण उद्यमियों को लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है।

औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों का कहना है कि यदि ताजोपुर में सड़क, जल निकासी, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और निर्बाध विद्युत आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए तो यहां स्थापित औद्योगिक इकाइयों को बेहतर माहौल मिल सकता है और औद्योगिक विकास की योजनाओं को वास्तविक धरातल पर गति मिल सकती है।