मऊ- बढ़ती उम्र में जहां सामान्य सर्जरी भी जोखिम भरी हो जाती है, वहीं जनपद के शारदा नारायण अस्पताल में 82 वर्षीय बुजुर्ग का सफल हिप ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने एक मिसाल पेश की है। जानकारी के अनुसार, जनपद मऊ के ग्राम एकडंगा निवासी 82 वर्षीय मोहन तिवारी के कूल्हे की हड्डी (फीमर के ऊपरी हिस्से) में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था। इस स्थिति में सर्जरी ही एकमात्र विकल्प था, लेकिन अधिक उम्र के कारण परिवार दुविधा में था कि ऑपरेशन कराया जाए या नहीं। अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. राहुल कुमार ने मरीज की पूरी जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी। उन्होंने सर्जरी से जुड़े जोखिमों की जानकारी परिवार को दी और अंतिम निर्णय उन पर छोड़ दिया। डॉक्टर के आत्मविश्वास और मरीज की स्थिति को देखते हुए परिवार ने ऑपरेशन के लिए सहमति दे दी। सर्जरी पहले 30 मार्च को होनी थी, लेकिन एनेस्थीसिया से जुड़ी सावधानियों के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। इसके बाद 31 मार्च को शाम तक ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि इस उम्र में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसमें हड्डियों की गुणवत्ता, दिल और फेफड़ों की स्थिति के साथ अन्य बीमारियों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ऑपरेशन के बाद रिकवरी भी एक बड़ी चुनौती होती है। फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर है और वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। रविवार को डॉक्टर के निगरानी में वॉकर के सहारे मरीज कुछ कदम चलकर दिखाए। डॉक्टरों को उम्मीद है कि वे जल्द ही सामान्य रूप से चलने लगेंगे। परिजनों ने डॉक्टर की सराहना करते हुए कहा कि उनके आत्मविश्वास से ही यह निर्णय लेना संभव हो पाया। यह सफल सर्जरी न केवल अस्पताल के लिए उपलब्धि है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मऊ जैसे छोटे शहरों में भी अब बेहतर और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
मऊ में 82 वर्षीय बुजुर्ग का सफल हिप ऑपरेशन: साहस, विश्वास और चिकित्सा कौशल की मिसाल
मऊ- बढ़ती उम्र में जहां सामान्य सर्जरी भी जोखिम भरी हो जाती है, वहीं जनपद के शारदा नारायण अस्पताल में 82 वर्षीय बुजुर्ग का सफल हिप ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने एक मिसाल पेश की है। जानकारी के अनुसार, जनपद मऊ के ग्राम एकडंगा निवासी 82 वर्षीय मोहन तिवारी के कूल्हे की हड्डी (फीमर के ऊपरी हिस्से) में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था। इस स्थिति में सर्जरी ही एकमात्र विकल्प था, लेकिन अधिक उम्र के कारण परिवार दुविधा में था कि ऑपरेशन कराया जाए या नहीं। अस्पताल के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ व सर्जन डॉ. राहुल कुमार ने मरीज की पूरी जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी। उन्होंने सर्जरी से जुड़े जोखिमों की जानकारी परिवार को दी और अंतिम निर्णय उन पर छोड़ दिया। डॉक्टर के आत्मविश्वास और मरीज की स्थिति को देखते हुए परिवार ने ऑपरेशन के लिए सहमति दे दी। सर्जरी पहले 30 मार्च को होनी थी, लेकिन एनेस्थीसिया से जुड़ी सावधानियों के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। इसके बाद 31 मार्च को शाम तक ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि इस उम्र में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसमें हड्डियों की गुणवत्ता, दिल और फेफड़ों की स्थिति के साथ अन्य बीमारियों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ऑपरेशन के बाद रिकवरी भी एक बड़ी चुनौती होती है। फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर है और वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। रविवार को डॉक्टर के निगरानी में वॉकर के सहारे मरीज कुछ कदम चलकर दिखाए। डॉक्टरों को उम्मीद है कि वे जल्द ही सामान्य रूप से चलने लगेंगे। परिजनों ने डॉक्टर की सराहना करते हुए कहा कि उनके आत्मविश्वास से ही यह निर्णय लेना संभव हो पाया। यह सफल सर्जरी न केवल अस्पताल के लिए उपलब्धि है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मऊ जैसे छोटे शहरों में भी अब बेहतर और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।
